MP Cabinet Meeting Official Report 28 OCT 2025 मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद बैठक: किसानों को मुआवजे में दोगुनी राहत, सरकारी आवासों पर सख्ती
भोपाल, 28 अक्टूबर 2025: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक ने प्रदेश के विकास की नई दिशा तय की है। यह बैठक न केवल आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों पर केंद्रित रही, बल्कि किसानों, आदिवासी समुदायों और सरकारी कर्मचारियों के हितों को मजबूत करने वाले कई अहम फैसलों का गवाह बनी। राज्य सरकार की ‘डबल इंजन’ की ताकत का प्रदर्शन करते हुए ये निर्णय प्रदेश को ऊर्जा सुरक्षा, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक दक्षता की ओर ले जाने वाले कदम साबित हो रहे हैं। बैठक में कुल 12 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से अधिकांश को तत्काल मंजूरी मिली। आइए, इन फैसलों की गहराई से पड़ताल करें और समझें कि ये मध्य प्रदेश के भविष्य को कैसे आकार देंगे।
बैठक का सबसे चर्चित निर्णय किसानों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति से जुड़ा है। प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के लिए हाई टेंशन लाइनों (132 केवी और उससे अधिक क्षमता वाली) की बिछाई जा रही है, जो ग्रामीण इलाकों के खेतों और निजी जमीनों से होकर गुजरती हैं। अब तक, इन लाइनों के लिए अधिग्रहीत भूमि के मालिकों को कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर मात्र 85 प्रतिशत मुआवजा दिया जाता था।
लेकिन मंत्रिपरिषद ने इस प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए इसे 200 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसका मतलब है कि यदि किसी किसान की जमीन अधिग्रहीत हो रही है, तो उसे बाजार मूल्य के दोगुने से अधिक राशि मिलेगी। यह फैसला विशेष रूप से उन लाखों किसानों के लिए वरदान साबित होगा, जो मालवा, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्रों में फैले हैं, जहां बिजली ग्रिड का विस्तार तेजी से हो रहा है।
इस बदलाव का प्रभाव व्यापक है। एक ओर, यह किसानों की आर्थिक हानि को कम करेगा, जिससे वे अपनी फसलों और आजीविका पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। दूसरी ओर, ऊर्जा विभाग को लाइनों की बिछाई में होने वाली देरी कम होगी, क्योंकि भूमि अधिग्रहण के विवाद घटेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में 5,000 किलोमीटर से अधिक हाई टेंशन लाइनें बिछाई गई हैं, और आने वाले तीन वर्षों में यह दोगुना होने का लक्ष्य है।
इससे न केवल ग्रामीण विद्युतीकरण तेज होगा, बल्कि औद्योगिक विकास को भी बल मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक के बाद कहा, “किसान हमारा अन्नदाता है। ऊर्जा विकास के नाम पर उनकी बलि नहीं चढ़ने देंगे। यह फैसला ‘अमित शाह’ की ऊर्जा नीति से प्रेरित है, जो किसान-केंद्रित विकास पर जोर देती है।” इस निर्णय से राज्य के 50 से अधिक जिलों में प्रभावित 10,000 से अधिक परिवारों को सीधा लाभ पहुंचेगा, और अनुमानित मुआवजा राशि 500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण फैसला सरकारी आवासों के दुरुपयोग पर लगाम लगाने से संबंधित है। राजधानी भोपाल सहित अन्य प्रमुख शहरों में सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले अधिकारी और कर्मचारी अक्सर रिटायरमेंट या स्थानांतरण के बाद भी इन्हें खाली नहीं करते। इससे नए आवंटियों को परेशानी होती है और सरकारी संपत्ति का नुकसान होता है। मंत्रिपरिषद ने ऐसे लोगों से मूल किराए के अतिरिक्त 30 प्रतिशत पेनल्टी वसूलने का प्रस्ताव मंजूर किया है।
MP Cabinet Meeting Official Report 28 OCT 2025
यह पेनल्टी मासिक आधार पर लागू होगी और इसे सीधे विभागीय वेतन से काटा जाएगा। इस कदम से न केवल सरकारी आवास पूल की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि अनुशासनहीनता पर अंकुश लगेगा। भोपाल में ही लगभग 5,000 सरकारी फ्लैट हैं, जिनमें से 20 प्रतिशत पर यह समस्या आम है। मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया, “यह फैसला पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। अब कोई बहाना नहीं चलेगा।”
बैठक में आदिवासी विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के तहत प्रदेश के 24 जिलों में भारिया, बैगा और सहरिया जनजातियों के अविद्युतीकृत घरों के विद्युतीकरण को गति देने का निर्णय लिया गया। प्रत्येक घरेलू विद्युतीकरण की सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है।
इससे 50,000 से अधिक घरों तक बिजली पहुंचेगी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। इसके अलावा, एग्रीटेक हब की स्थापना के लिए 15 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली, जो कृषि नवाचार को बढ़ावा देगा। बैठक में जल संसाधन परियोजनाओं की समीक्षा भी हुई, जहां मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता और समयबद्धता पर जोर दिया।
ये फैसले मध्य प्रदेश को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर ले जा रहे हैं। किसानों को मुआवजे में दोगुनी राहत न केवल आर्थिक न्याय प्रदान करेगी, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी सशक्त बनाएगी। सरकारी आवासों पर सख्ती से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी,
जबकि आदिवासी योजनाएं सामाजिक समावेश को मजबूत करेंगी। डॉ. मोहन यादव सरकार का यह प्रयास साबित करता है कि विकास का मतलब केवल आंकड़े नहीं, बल्कि जन-कल्याण है। आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर जमीन पर दिखेगा, और प्रदेश एक नए युग की ओर अग्रसर
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