PM Dhan-Dhanya Agriculture Scheme new update पीएम धन-धान्य कृषि योजना: 1.7 करोड़ किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
पीएम धन-धान्य कृषि योजना 2025 के बारे में जानें, जो 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को लाभ देगी। इस योजना के उद्देश्य, लाभ और कार्यान्वयन की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
दोस्तों, अगर आप भारतीय किसानों के लिए सरकार की नई योजनाओं के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। आज हम बात करेंगे प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के बारे में, जो 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इस लेख में हम इस योजना के हर पहलू को आसान और दोस्ताना अंदाज में समझाएंगे, जैसे कि हम आपके सामने बैठकर बात कर रहे हों। तो चलिए, शुरू करते हैं!
Introduction
दोस्तों, भारत एक कृषि प्रधान देश है, और हमारे किसान देश की रीढ़ हैं। लेकिन कई बार कम उत्पादकता, संसाधनों की कमी और ऋण की अनुपलब्धता जैसे मुद्दों ने किसानों को परेशान किया है। इन्हीं समस्याओं को हल करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) शुरू की है।
यह योजना 2025-26 से लागू होगी और अगले 6 साल तक 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाएगी। आइए, इस योजना को 5 प्रमुख बिंदुओं में समझते हैं ताकि आपको सारी जानकारी स्पष्ट और आसान तरीके से मिले।
1. पीएम धन-धान्य कृषि योजना क्या है?
दोस्तों, यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित है। इसका मकसद उन 100 जिलों को विकसित करना है, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसल सघनता मध्यम है, और ऋण की उपलब्धता औसत से कम है।
इस योजना के तहत सरकार 11 मंत्रालयों की 36 मौजूदा योजनाओं को एक साथ लाएगी। यानी, यह एक नई स्कीम नहीं है, बल्कि पहले से चल रही योजनाओं का समन्वय है, जो किसानों को एक छत के नीचे सारी सुविधाएं देगा। इसका वार्षिक बजट 24,000 करोड़ रुपये है, और कुल 6 साल में 1.44 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे।
2. इस योजना के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
दोस्तों, इस योजना के पांच बड़े लक्ष्य हैं, जो किसानों की जिंदगी को आसान और बेहतर बनाएंगे:
- कृषि उत्पादकता बढ़ाना: कम उत्पादकता वाले जिलों में आधुनिक तकनीकों और संसाधनों का उपयोग करके पैदावार को बढ़ाया जाएगा।
- फसल विविधीकरण: किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने की बजाय अलग-अलग फसलों, जैसे दाल, तिलहन और बागवानी, को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- टिकाऊ खेती: प्राकृतिक खेती और जल-मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा देना।
- भंडारण और प्रोसेसिंग: पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण और प्रोसेसिंग की सुविधाएं बढ़ेंगी, ताकि उपज की बर्बादी कम हो।
- आसान ऋण उपलब्धता: अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऋण की सुविधा को बेहतर बनाना।
- ये लक्ष्य न केवल किसानों की आय बढ़ाएंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे।
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3. किन जिलों को मिलेगा इस योजना का लाभ?
दोस्तों, इस योजना के लिए 100 जिलों का चयन तीन मापदंडों के आधार पर होगा:
- कम उत्पादकता: जहां फसलों की पैदावार राष्ट्रीय औसत से कम है।
- मध्यम फसल सघनता: जहां खेतों का उपयोग एक साल में कम फसलों के लिए हो रहा है।
- कम ऋण उपलब्धता: जहां किसानों को बैंकों से पर्याप्त ऋण नहीं मिल रहा।
- हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से कम से कम एक जिला चुना जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्रालय इन मापदंडों के आधार पर डेटा इकट्ठा कर रहा है, और अगस्त 2025 तक जिलों की सूची तैयार हो जाएगी। अक्टूबर 2025 से रबी फसल के साथ योजना का कार्यान्वयन शुरू होगा।
4. योजना का कार्यान्वयन और निगरानी कैसे होगी?
दोस्तों, इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने एक मजबूत ढांचा तैयार किया है:
जिला स्तर पर: हर जिले में एक जिला धन-धान्य समिति बनेगी, जिसमें प्रगतिशील किसान और स्थानीय अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति स्थानीय जरूरतों के हिसाब से एक जिला कृषि योजना तैयार करेगी।
राज्य और राष्ट्रीय स्तर: निगरानी के लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां बनेंगी, जो योजना की प्रगति पर नजर रखेंगी।
डिजिटल डैशबोर्ड: 117 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर हर जिले की मासिक प्रगति एक डिजिटल डैशबोर्ड पर अपडेट होगी।
नीति आयोग की भूमिका: नीति आयोग इस योजना को मार्गदर्शन देगा और जिलों की रैंकिंग करेगा, जैसे आकांक्षी जिला कार्यक्रम में करता है।
मोबाइल ऐप: किसानों के लिए एक बहुभाषी मोबाइल ऐप लॉन्च होगा, जिससे उन्हें योजना की जानकारी और सुविधाएं आसानी से मिलेंगी।
5. किसानों को क्या-क्या लाभ मिलेंगे?
दोस्तों, अब बात करते हैं कि यह योजना हमारे किसान भाइयों और बहनों के लिए क्या लेकर आएगी:
- आधुनिक तकनीक: ड्रोन, बीजों की नई किस्में और उन्नत खेती के तरीकों तक पहुंच।
- बेहतर सिंचाई: सिंचाई सुविधाओं में सुधार से पानी की कमी की समस्या कम होगी।
- आसान ऋण: ग्रामीण ऋण स्कोर सिस्टम से बैंकों से लोन लेना आसान होगा।
- भंडारण और प्रोसेसिंग: फसल कटाई के बाद नुकसान कम होगा, और उपज की कीमत बढ़ेगी।
- महिला और छोटे किसानों को प्राथमिकता: ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, और स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं और छोटे किसानों को विशेष लाभ।
- दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता: दाल और तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देकर आय में वृद्धि।
- इसके अलावा, बागवानी, पशुपालन, और मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
Conclusion
दोस्तों, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना भारतीय किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है। यह योजना न केवल उनकी आय बढ़ाएगी, बल्कि खेती को आधुनिक, टिकाऊ, और जलवायु अनुकूल बनाएगी। 1.7 करोड़ किसानों को लाभ देने वाली यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर आप इस योजना के बारे में और जानना चाहते हैं, तो कृषि मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या अपने नजदीकी कृषि कार्यालय से संपर्क करें।
तो दोस्तों, इस योजना के बारे में आप क्या सोचते हैं? अपने विचार हमारे साथ साझा करें, और अगर आपके कोई सवाल हैं, तो पूछना न भूलें!
External Links:
कृषि मंत्रालय, भारत सरकार
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
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