What Is The New Mission Launched To Achieve Self Sufficiency In Pulses दालों में आत्मनिर्भरता मिशन: तूर, उड़द, मसूर उत्पादन बढ़ाने की पूरी जानकारी दालों में आत्मनिर्भरता मिशन के बारे में जानें! तूर, उड़द, और मसूर के उत्पादन को बढ़ाने की सरकारी योजना, इसके लाभ, और किसानों के लिए अवसरों की पूरी जानकारी। पढ़ें और अपडेट रहें!
दोस्तों, क्या आपने सुना है कि भारत सरकार दालों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक खास मिशन शुरू कर रही है? जी हाँ, दालों में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत तूर, उड़द, और मसूर की खेती को बढ़ावा देने की बड़ी योजना है।
अगर आप सोच रहे हैं कि ये मिशन क्या है, कैसे काम करेगा, और इससे किसानों और आम लोगों को क्या फायदा होगा, तो बस थोड़ा रुकिए! मैं आपको इस मिशन की सारी बातें, बिल्कुल दोस्ताना अंदाज में, आसान भाषा में समझाने जा रहा हूँ। तो चलिए, शुरू करते हैं!
Introduction
दोस्त, भारत में दालें तो हमारे खाने की शान हैं, है ना? रोटी के साथ दाल हो या चावल के साथ, ये हर घर की जरूरत है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में दालों की मांग इतनी ज्यादा है कि हमें कई बार दूसरे देशों से इन्हें आयात करना पड़ता है?
अब सरकार ने ठान लिया है कि हमें दालों में आत्मनिर्भर बनना है। दालों में आत्मनिर्भरता मिशन इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका लक्ष्य है तूर (अरहर), उड़द, और मसूर का उत्पादन बढ़ाना। इस लेख में मैं आपको इस मिशन के बारे में 5 खास बातें बताऊंगा, जो आपको इसे समझने में मदद करेंगी।
1. दालों में आत्मनिर्भरता मिशन क्या है?
दोस्त, ये मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मकसद है भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना। भारत में हर साल करीब 26-28 मिलियन टन दालों की जरूरत होती है, लेकिन हमारा उत्पादन अभी लगभग 23-24 मिलियन टन ही है।
बाकी की पूर्ति आयात से होती है, जिससे विदेशी मुद्रा खर्च होती है। इस मिशन के तहत सरकार तूर, उड़द, और मसूर की खेती को बढ़ावा दे रही है।
- इसके लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जैसे:
- किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराना।
- आधुनिक खेती की तकनीकों को बढ़ावा देना।
- दालों की खेती के लिए सब्सिडी और लोन की सुविधा।
ये मिशन न सिर्फ किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि आम लोगों के लिए भी दालों की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
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2. तूर, उड़द, और मसूर पर क्यों फोकस?
अब आप सोच रहे होंगे कि सरकार ने सिर्फ तूर, उड़द, और मसूर को ही क्यों चुना? दोस्त, इसका जवाब बड़ा आसान है। ये तीनों दालें भारत में सबसे ज्यादा खपत होती हैं। तूर दाल तो दक्षिण भारत की सांभर और रसम की जान है, उड़द दाल से हमारी प्यारी डोसा-इडली बनती है, और मसूर दाल हर घर में बनने वाली साधारण दाल है।
लेकिन इन दालों का उत्पादन हमारी जरूरत के हिसाब से कम है। मिसाल के तौर पर:
- तूर दाल: भारत में इसकी मांग करीब 4.5 मिलियन टन है, लेकिन उत्पादन सिर्फ 3.5-4 मिलियन टन।
- उड़द दाल: मांग 3 मिलियन टन, उत्पादन 2-2.5 मिलियन टन।
- मसूर दाल: मांग 2.5 मिलियन टन, उत्पादन 1.5-2 मिलियन टन।
इन आंकड़ों से साफ है कि हमें इन दालों का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। इसलिए सरकार इन पर खास ध्यान दे रही है।
3. सरकार के इस मिशन के मुख्य उद्देश्य
दोस्त, इस मिशन के पीछे सरकार के कुछ बड़े और साफ उद्देश्य हैं। मैं आपको इन्हें बिल्कुल आसान भाषा में बताता हूँ:
उत्पादन बढ़ाना: 2027 तक तूर, उड़द, और मसूर का उत्पादन 30% तक बढ़ाने का लक्ष्य।
आयात कम करना: अभी भारत कनाडा, म्यांमार, और ऑस्ट्रेलिया से दालें आयात करता है। मिशन का लक्ष्य है इसे 50% तक कम करना।
किसानों की आय बढ़ाना: दालों की खेती से किसानों को ज्यादा मुनाफा हो, इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार सुविधाएँ दी जाएंगी।
पोषण सुरक्षा: दालें प्रोटीन का बड़ा स्रोत हैं। इनका उत्पादन बढ़ने से हर भारतीय के थाली में पोषण सुनिश्चित होगा।
4. किसानों के लिए क्या हैं इस मिशन के फायदे?
अगर आप किसान हैं या आपके परिवार में कोई खेती करता है, तो ये मिशन आपके लिए खास है। सरकार ने किसानों के लिए कई सुविधाएँ शुरू की हैं:
मुफ्त और बेहतर बीज: सरकार उच्च गुणवत्ता वाले बीज मुफ्त या कम कीमत पर दे रही है।
सिंचाई सुविधाएँ: दालों की खेती के लिए ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम पर सब्सिडी।
प्रशिक्षण और तकनीक: किसानों को आधुनिक खेती की ट्रेनिंग और मशीनों के इस्तेमाल की जानकारी दी जा रही है।
बाजार सहायता: दालों की बिक्री के लिए ई-नाम (e-NAM) जैसे प्लेटफॉर्म और MSP की गारंटी।
इसके अलावा, सरकार ने 2023-24 के बजट में दालों के लिए 1,000 करोड़ रुपये का अलग फंड भी रखा है। तो दोस्त, अगर आप खेती से जुड़े हैं, तो ये मिशन आपके लिए सुनहरा मौका है!
5. आम लोगों को इससे क्या फायदा?
अब आप कहेंगे, “भाई, ये सब तो किसानों के लिए है, हमें क्या मिलेगा?” अरे दोस्त, ये मिशन आपके और मेरे लिए भी बहुत फायदेमंद है। कैसे? चलिए, बताता हूँ:
दालों की कीमतें कम होंगी: उत्पादन बढ़ने से दालों की कीमतें स्थिर रहेंगी या कम होंगी।
बेहतर गुणवत्ता: स्थानीय उत्पादन बढ़ने से ताजी और अच्छी क्वालिटी की दालें मिलेंगी।
रोजगार के अवसर: दालों की खेती और प्रोसेसिंग से गाँवों में नई नौकरियाँ बनेंगी।
पोषण में सुधार: सस्ती और उपलब्ध दालों से हर घर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ेगी।
Conclusion
तो दोस्त, अब आप समझ गए होंगे कि दालों में आत्मनिर्भरता मिशन कितना खास है। ये न सिर्फ हमारे किसानों की जिंदगी बेहतर करेगा, बल्कि हमारी थाली को भी और पौष्टिक बनाएगा। सरकार का ये कदम भारत को दालों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। अगर आप किसान हैं, तो इस मिशन का फायदा जरूर उठाएँ। और अगर आप आम उपभोक्ता हैं, तो तैयार रहिए सस्ती और अच्छी दालों का स्वाद लेने के लिए!
अगर आपको इस मिशन के बारे में और जानना है, तो कृषि मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ताजा अपडेट्स देख सकते हैं। और हाँ, अपने दोस्तों के साथ ये जानकारी शेयर करना न भूलें!
External Links:
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय – दालों में आत्मनिर्भरता मिशन की ताजा जानकारी।
ई-नाम पोर्टल – किसानों के लिए बाजार सुविधाएँ।
पीएम किसान योजना – किसानों के लिए सरकारी योजनाएँ।
नोट: ये जानकारी 11 अगस्त 2025 तक की उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। सरकार की योजनाओं में बदलाव हो सकता है, इसलिए ताजा अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट्स चेक करें